Gyani Pandit - सत्कर्म का फल कभी व्यर्थ नहीं जाता ।
🔯 महाभारत की एक शिक्षाप्रद कहानी 🔯 सत्कर्मों का फल देर से मिलने की वजह से लोग अक्सर दुष्कर्मों को अपना लेते है । किन्तु ऐसा करने वाले हमेशा याद रखे “ अपने किये हुए कर्म का फल जीव अवश्य भोगता है ” ऐसा गीता में कहा गया है । “ सत्कर्म का फल कभी व्यर्थ नहीं जाता ” यह इस छोटी सी कहानी में समझाया गया है । महाभारत के समय की बात है । उस समय सभी लोग नदियों के किनारे या घाट पर स्नान करने जाया करते थे । एक दिन प्रातःकाल द्रौपदी भी यमुना स्नान को गई । उसी समय एक महात्मा भी उससे थोड़ी ही दुरी पर स्नान करने आये । महात्मा ने अपना एक वस्त्र यमुना किनारे रख दिया और नदी में उतरकर नहाने लगे । थोड़ी ही देर में जब दौपदी ने स्नान कर लिया तो वह नगर की ओर जाने को हुई, तभी उसने देखा कि महात्मा अभी भी यमुना में ही खड़े थे (महात्मा का अधोवस्त्र यमुना के तीव्र प्रवाह में बह चूका था ) । उसे आश्चर्य तो हुआ किन्तु फिर भी वह आगे बढ़ दी । थोड़ी दूर जाने के बाद उसने फिर मुड़कर महात्मा की ओर देखा तो पता चला कि महात्मा नदी में नहीं है । ध्यान से देखने पर ज्ञात हुआ कि महात्मा पास की एक झाड़ी में छुपकर...