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नवरात्रि में अवश्य पढ़ें दुर्गा महिमा की यह पावन लोककथा by Gyani Pandit

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  Navratri Lok Katha - Jai Maa Durga कौशल देश में सुशील नामक का एक निर्धन ब्राह्मण रहता था। प्रतिदिन मिलने वाली भिक्षा से वह अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। उसके कई बच्चे थे। प्रातःकाल वह भिक्षा लेने घर से निकलता और सायंकाल लौट आता था। देवताओं, पितरों और अतिथियों की पूजा करने के बाद आश्रितजन को खिलाकर ही वह स्वयं भोजन ग्रहण करता था। इस प्रकार भिक्षा को वह भगवान का प्रसाद समझकर स्वीकार करता था। इतना दुःखी होने पर भी वह दूसरों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहता था। यद्यपि उसके मन में अपार चिंता रहती थी, तथापि वह सदैव धर्म-कर्म में लगा रहता था। अपनी इन्द्रियों पर उसका पूर्ण नियंत्रण था। वह सदाचारी, धर्मात्मा और सत्यवादी था। उसके हृदय में कभी क्रोध, अहंकार और ईर्ष्या जैसे तुच्छ विकार उत्पन्न नहीं होते थे। एक बार उसके घर के निकट सत्यव्रत नामक एक तेजस्वी ऋषि आकर ठहरे। वे एक प्रसिद्ध तपस्वी थे। मंत्रों और विद्याओं का ज्ञाता उनके समान आस-पास दूसरा कोई नहीं था। शीघ्र ही अनेक व्यक्ति उनके दर्शनों को आने लगे। सुशील के हृदय में भी उनसे मिलने की इच्छा जागृत हुई और वह उनकी सेवा में उपस्थित हुआ। स...

निर्जला एकादशी और मंगलवार का योग, निर्जल रहकर व्रत करने की परंपरा, द्वादशी पर जल कलश का दान करें by Gyani Pandit (2-June-2020)

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ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी, इस दिन निर्जल रहकर करना होता है व्रत |   मंगलवार, 2 जून को निर्जला एकादशी है। सालभर की सभी एकादशियों से ज्यादा महत्व ज्येष्ठ मास के शुक्ल की एकादशी का है। इसे निर्जला, पांडव और भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं। इस तिथि पर भगवान विष्णु के लिए व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि इस एक दिन के व्रत से सालभर की सभी एकादशियों के बराबर पुण्य फल मिलता है। इसे एकादशी को क्यों कहते हैं भीमसेनी एकादशी महाभारत की एक प्रचलित कथा के अनुसार भीम ने एकादशी व्रत के संबंध में वेदव्यास से कहा था मैं एक दिन तो क्या, एक समय भी खाने के बिना नहीं रह सकता हूं, इस वजह से मैं एकादशी व्रत का पुण्य प्राप्त नहीं कर संकूगा। तब वेदव्यास ने ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी के बारे में बताया। उन्होंने भीम से कहा कि तुम इस एकादशी का व्रत करो। इस एक व्रत से तुम्हें सालभर की सभी एकादिशियों का पुण्य मिल जाएगा। भीम ने इस एकादशी पर व्रत किया था, इसी वजह से इसे भीमसेनी एकादशी कहते हैं। इसे क्यों कहते हैं निर्जला एकादशी इस तिथि पर निर्जल रहकर यानी बिना पानी पिए व्रत ...

जन्‍माष्‍टमी का महत्‍व and श्रीकृष्‍ण के जन्‍म की कथा by Gyani Pandit (23-August-2019)

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जन्‍माष्‍टमी हिन्‍दुओं का प्रमुख त्‍योहार है. हिन्‍दू मान्‍यताओं के अनुसार सृष्टि के पालनहार श्री हरि विष्‍णु के आठवें अवतार नटखट नंदलाल यानी कि श्रीकृष्‍ण के जन्‍मदिन को श्रीकृष्‍ण जयंती या जन्‍माष्‍टमी के रूप में मनाया जाता है. हालांकि इस बार कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी की तारीख को लेकर लोगों में काफी असमंजस में हैं. लोग उलझन में हैं कि जन्‍माष्‍टमी 23 अगस्‍त या फिर 24 अगस्‍त को मनाई जाए. दरअसल, मान्‍यता है कि भगवान श्रीकृष्‍ण का जन्‍म भाद्रपद यानी कि भादो माह की कृष्‍ण पक्ष की अष्‍टमी को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था. अगर अष्‍टमी तिथि के हिसाब से देखें तो 23 अगस्‍त को जन्‍माष्‍टमी होनी चाहिए, लेकिन अगर रोहिणी नक्षत्र को मानें तो फिर 24 अगस्‍त को कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी होनी चाहिए. आपको बता दें कि कुछ लोगों के लिए अष्‍टमी तिथि का महत्‍व सबसे ज्‍यादा है वहीं कुछ लोग रोहिणी नक्षत्र होने पर ही जन्‍माष्‍टमी का पर्व मनाते हैं.  हिन्‍दू पंचांग के अनुसार कृष्ण जन्माष्टमी भद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि यानी कि आठवें दिन मनाई जाती है. ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी हर स...

क्यों है श्रावण मास सबसे खास, पढ़ें पौराणिक कथाएं by Gyani Pandit

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पौराणिक मान्यता के अनुसार श्रावण महीने को देवों के देव महादेव भगवान शंकर का महीना माना जाता है। इस संबंध में पौराणिक कथा है कि जब सनत कुमारों ने महादेव से उन्हें श्रावण महीना प्रिय होने का कारण पूछा तो महादेव भगवान शिव ने बताया कि जब देवी सती ने अपने पिता दक्ष के घर में योगशक्ति से शरीर त्याग किया था, उससे पहले देवी सती ने महादेव को हर जन्म में पति के रूप में पाने का प्रण किया था। अपने दूसरे जन्म में देवी सती ने पार्वती के नाम से हिमाचल और रानी मैना के घर में पुत्री के रूप में जन्म लिया। पार्वती ने युवावस्था के श्रावण महीने में निराहार रह कर कठोर व्रत किया और उन्हें प्रसन्न कर विवाह किया, जिसके बाद ही महादेव के लिए यह विशेष हो गया। श्रावण में शिवशंकर की पूजा :-  श्रावण के महीने में भगवान शंकर की विशेष रूप से पूजा की जाती है। इस दौरान पूजन की शुरुआत महादेव के अभिषेक के साथ की जाती है। अभिषेक में महादेव को जल, दूध, दही, घी, शक्कर, शहद, गंगाजल, गन्ना रस आदि से स्नान कराया जाता है। अभिषेक के बाद बेलपत्र, समीपत्र, दूब, कुशा, कमल, नीलकमल, ऑक मदार, जंवाफूल...

Gyani Pandit Ji - गरुड़जी के सात प्रश्न तथा काकभुशुण्डि के उत्तर

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कलिमल नशावन ,श्री राम कथा पावन,जे नर मन से गावहीं । प्रभु पद पावन,पद रज भावन,अजय भक्ति सो पावहीं ।।         || इसमें कोई संशय नही है||                        ||ऱाम|| चौपाई : * पुनि सप्रेम बोलेउ खगराऊ। जौं कृपाल मोहि ऊपर भाऊ॥। नाथ मोहि निज सेवक जानी। सप्त प्रस्न मम कहहु बखानी॥1॥ भावार्थ:-पक्षीराज गरुड़जी फिर प्रेम सहित बोले- हे कृपालु! यदि मुझ पर आपका प्रेम है, तो हे नाथ! मुझे अपना सेवक जानकर मेरे सात प्रश्नों के उत्तर बखान कर कहिए॥1॥ * प्रथमहिं कहहु नाथ मतिधीरा। सब ते दुर्लभ कवन सरीरा॥ बड़ दुख कवन कवन सुख भारी। सोउ संछेपहिं कहहु बिचारी॥2॥ भावार्थ:-हे नाथ! हे धीर बुद्धि! पहले तो यह बताइए कि सबसे दुर्लभ कौन सा शरीर है फिर सबसे बड़ा दुःख कौन है और सबसे बड़ा सुख कौन है, यह भी विचार कर संक्षेप में ही कहिए॥2॥ * संत असंत मरम तुम्ह जानहु। तिन्ह कर सहज सुभाव बखानहु॥ कवन पुन्य श्रुति बिदित बिसाला। कहहु कवन अघ परम कराला॥3॥ भावार्थ:-संत और असंत का मर्म (भेद) आप जानते हैं, उनके सहज स्वभाव का वर्णन...

Gyani Pandit Ji - हनुमान जयंती 2018: बजरंगबली से जुड़ें ये 9 रहस्य शायद आप नहीं जानते होंगे

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31 मार्च को हनुमान जयंती है। हनुमान जी सभी देवों में ऐसे देवता है जो अपने भक्तों के द्वारा प्रसन्न करने पर बहुत जल्द खुश हो जाते है। भक्तों के हर कष्ट को बस नाम लेने से ही हर लेते हैं भगवान हनुमान। भगवान हनुमान आज भी इस पृथ्वी पर जीवित स्थिति में भ्रमण करते हैं। पवन पुत्र बजरंगबली के जीवन के कुछ ऐसे रहस्य हैं जिनके बारें में शायद आपको नहीं मालूम होगा। हनुमान जयंती के मौके पर आइए जानते है उनके जीवन की 9 रहस्यमयी बातें। हनुमानजी के गुरू हनुमानजी मातंग ऋषि के शिष्य थे। वैसे तो हनुमान जी ने कई लोगों से शिक्षा ली थी। सूर्यदेव और नारदजी के अलावा इन्होंने मातंग ऋषि से भी शिक्षा-दीक्षा ली थी। कहते है मातंग ऋषि के आश्रम में ही हनुमानजी का जन्म हुआ था। ऐसी मान्यता है श्रीलंका के जंगलों में मंतग ऋषि के वंशज आदिववासी से हनुमान जी प्रत्येक 41 साल बाद मिलने आते है। हनुमानजी और भगवान राम के बीच का युद्ध हनुमान जी ने अपने प्रभु राम के साथ युद्ध भी किया था। दरअसल  एक बार भगवान राम के गुरु विश्वामित्र किसी कारणवश हनुमानजी से नाराज हो गए और उन्होंने रामजी को हनुमान जी को मौत की सजा देने को क...

Gyani Pandit Ji - ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ||

Gyani Pandit Ji - होली क्यों मनाते हैं?

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होली को ‘रंगों का त्यौहार’ कहा जाता है. हिंदू धर्म के अनुसार होली फाल्गुन महीने में पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। होली हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है Holi Festival Celebration in Hindi. होली बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस दिन लोग आपस में रंग और पानी फैंकते है उर एक दूसरे को होली की बधाई देते हैं. बच्चे, जवान और बूढ़े सब इस त्योहार में मस्ती, गाना और डांस करते हैं. ढोल और लाउडस्पिकर में ज़ोर ज़ोर से गाने बजाते हैं और डांस करते हैं. हिन्दू धर्म के अन्य त्यौहारों की तरह होली का त्योहार भी पौराणिक और सांस्कृतिक है. होली मनाने के एक रात पहले होली को जलाया जाता है। इसके पीछे एक पौराणिक कथा है जिसके अनुसार होली से हिरण्यकश्यप की कहानी जुड़ी है। हिरण्यकश्यप प्राचीन भारत का एक राजा था जो अपने छोटे भाई की मौत का बदला भगवान विष्णु से लेना. था क्यूंकी भगवान विष्णु ने ही उसके छोटे भाई को मारा था. हिरण्यकश्यप ने अपने छोटे भाई का बदला लेने के लिए ब्रम्हा जी की तपस्या की और उसे वरदान भी मिल ही गया. ब्रम्हा जी से मिले इस वरदान से हिरण्यकश्यप को घमंड हो गया और खुद को ही भगवान समझ...

Gyani Pandit Ji - महाशिवरात्रि कथा और व्रत विधि

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महा शिवरात्रि के अनुष्ठान इस दिन भक्त लोग भगवान शिव  की स्तुति करते हुए श्लोक और भजन गीत गाते है ताकि उनको उनके पापों से मुक्ति मिल सके। वे परंपरागत रूप से शिवलिंग पर दूध पानी बेल के पत्ते और फलों को चडाते हैं। भक्त गंगा की पवित्र नदी में डुबकी से दिन की शुरूआत करते हैं। इस दिन अविवाहित महिला भक्त एक अच्छे पति के लिए पार्वती देवी को प्रार्थना करती हैं और विवाहित महिलाएं अपने पतियों और बच्चों की भलाई के लिए प्रार्थना करती हैं। मंदिरों में पूजा करने के लिए भक्त पवित्र का प्रयोग करते हैं। कुछ लोग शिवलिंगम पर गाय का दूध चडाते हैं। "शंकरजी की जय" और "महादेवजी की जय" के नारे लगाये जाते है। महाशिवरात्रि कथा वैसे तो इस महापर्व के बारे में कई पौराणिक कथाएं मान्य हैं, परन्तु हिन्दू धर्म ग्रन्थ शिव पुराण की विद्येश्वर संहिता के अनुसार इसी पावन तिथि की महानिशा में भगवान भोलेनाथ का निराकार स्वरूप प्रतीक लिंग का पूजन सर्वप्रथम ब्रह्मा और भगवान विष्णु के द्वारा हुआ, जिस कारण यह तिथि शिवरात्रि के नाम से विख्यात हुई। महा शिवरात्रि पर भगवान शंकर का रूप जहां प्रलयकाल में सं...

Gyani Pandit Ji - पीपल में है शनि देव का वास !

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पीपल में है शनि देव का वास ! हमारे सनातन धर्म में सभी पेड़ पौधो में पीपल की पूजा का अत्यंत महत्व है | धर्म शास्त्रों में बताया गया है की इस पेड़ में त्रिदेव के साथ लक्ष्मी जी शनि और बालाजी महाराज का भी वास है | सभी 33 कोटि देवी देवता इसमे निवास करते है | शनिवार के दिन भगवान शनिदेव संध्या के समय इस वृक्ष में निवास करते है अत: शनिवार के दिन संध्या के समय एक तेल का दीपक जरुर प्रज्जवलित करना चाहिए | आइये जाने कैसे शनि भगवान का वास पीपल में हुआ , इससे जुडी पौराणिक कथा, क्यों शनि  का वास पीपल में ! एक समय कि बात है असुरो ने तीन लोक और चौदय भुवन में अपना आतंक पनपा रखा था | एक असुर कैटभ ने तो एक ऋषि आश्रम में पीपल का रूप धारण कर रखा था | जब भी कोई ऋषि किसी कारण वश उस पेड़ के निचे आता तो वो असुर उसे निगल जाता | इस तरह उस आश्रम से ऋषि गण कम होने लगे | वे कैसे लापता हो रहे थे , यह सभी के लिए पहेली बना हुआ था | सभी ऋषि मुनि सूर्यदेवता के पुत्र शनिदेव के पास गए और उनसे सहायता कि गुहार लगाईं, तब शनिदेव उनकी प्रार्थना सुनकर एक ऋषिमुनि के वेश धारण किया और उस आश्रम में रहने लगे | एक दि...

Gyani Pandit Ji - क्यों होती है खंडित शिवलिंग की पूजा?

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क्या आप जानते है की सिर्फ भगवान शिव के ही रूप शिवलिंग की पूजा खंडित रूप में भी हो सकती है | जबकि अन्य सभी देवी देवताओ की मूर्तियाँ खंडित होने पर पूजा के योग्य नही मानी जाती | उन टूटी हुई प्रतिमाओ को पीपल के वृक्ष की जड़ में रख दिया जाता है | ध्यान रखे यदि शिव प्रतिमा टूट गयी है तो उसकी भी पूजा नही करनी चाहिए | क्यों होती है खंडित शिवलिंग की पूजा शिव के जन्म कथा से पता चलता है की शिव निराकार और साकार दोनों रूप में पूजे जाते है | शिव के साकार रूप में उनकी प्रतिमा तो निराकार रूप में शिवलिंग की पूजा की महिमा बताई गयी है | शिवलिंग की पूजा सबसे अच्छी महान बताई गयी है | यदि शिवलिंग कितना भी खंडित हो जाये , हर अवस्था में पूजनीय माना गया है | शास्त्रों में हर तरह के शिवलिंग की महिमा और महत्व बताया गया है | शिवलिंग पूजा विधि से सभी मनोरथ और कामना पूर्ण होती है | इस पूजा में ध्यान रखे की कैसे करे शिव को प्रसन्न | सभी शिव भक्तो को यह जरुर ध्यान रखना चाहिए की शिवलिंग की पूजा करते समय उनका मुख उत्तर दिशा में होना चाहिए | शिवलिंग की परिक्रमा भी कभी पूरी नही करनी चाहिए क्योकि जलधारी को कभी ...